जय गुरु देव
समय का जगाया हुआ नाम जयगुरुदेव मुसीबत में बोलने से जान माल की रक्षा होगी ।
परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज, उज्जैन (मध्य प्रदेश)

संत रविदास जी महाराज के बारे में


“जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।” (Sant Ravidas Ji Maharaj)

इस दोहे के रचनाकार भारत देश के प्रख्यात संत रविदास जी महाराज है। भारत देश (India) को संत महात्माओं की भूमि कहा जाता है। भारत की धरती पर कई बड़े संतों ने जन्म लिया है। इन महान संतों में रविदास जी महाराज (Sant Ravidas ji maharaj) एक विशेष महत्वपूर्ण संत माने गए हैं। जातिवादी (Casteism) को छोड़कर प्यार करना रविदास जी ने इस दुनिया को सिखाया है। रविदास जी ने हमेशा ही अपने दोहों और रचनाओं के जरिए लोगों को समाज में फैली बुराइयों और कुरीतियों के बारे में बताया है और इन्हें दूर करने के लिए प्रोत्साहित (Inspire) किया है। संत रविदास जी महाराज ने सभी को भगवान की भक्ति के साथ साथ ही सच्चाई की राह पर चलने की भी प्रेरणा दी है।

संत रविदास जी महाराज (Sant Ravidas ji Maharaj) ने सबको एकता के सूत्र में चलाने की भी कोशिश की है। संत रविदास जी महाराज ने अपनी काव्य रचनाओं को सरल और व्यवहारिक ब्रजभाषा में लिखा है। संत रविदास जी महाराज ने अपनी रचनाओं में अक्सर खड़ी बोली, राजस्थानी, उर्दू, फारसी, अवधि जैसी भाषाओं के शब्दों का उपयोग किया है।

About Sant Ravidas Ji Maharaj


“There are castes among castes, which are the leaves of Ketan. Raidas humans cannot join unless the caste is destroyed.” (Sant Ravidas Ji Maharaj)

The creator of this couplet is the famous saint of India, Ravidas Ji Maharaj. India is called the land of saints and mahatmas. Many great saints have been born on Indian soil. Ravidas Ji Maharaj is considered a particularly important saint among these great saints. Ravidas ji has taught this world to leave casteism and love. Ravidas ji, through his couplets and compositions, has always told people about the evils and evils prevalent in the society and encouraged them to remove them. Saint Ravidas Ji Maharaj has inspired everyone to follow the path of truth along with devotion to God.

Saint Ravidas Ji Maharaj has also tried to lead everyone in the direction of unity. Saint Ravidas Ji Maharaj has written his poetic works in simple and practical Braj language. Sant Ravidas Ji Maharaj has often used words from languages ​​like Khadi Boli, Rajasthani, Urdu, Persian, Awadhi in his works.